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Acharya Shri Umaswati
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स द्विविधोऽष्टचतुर्भेदः ॥९॥
सूत्रार्थ – वह उपयोग दो प्रकार का है – ज्ञानोपयोग और दर्शनोपयोग। ज्ञानोपयोग आठ प्रकार का है और दर्शनोपयोग चार प्रकार का है॥९॥

भावार्थ

अर्थ: वह उपयोग दो प्रकार का है – ज्ञानोपयोग और दर्शनोपयोग। ज्ञानोपयोग के आठ भेद हैं – मति, श्रुत, अवधि, मनःपर्यय और केवल। ये पाँच ज्ञान और कुमति, कुश्रुत और कुअवधि ये तीन अज्ञान। तथा दर्शनोपयोग के चार भेद हैं – चक्षुदर्शन, अचक्षुदर्शन, अवधिदर्शन और केवलदर्शन।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

English Meaning:

Cognition (upayoga) is of two kinds. And these, in turn, are of eight and four kinds, respectively.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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उपयोग (जीव का लक्षण)
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    A["उपयोग<br>(जीव का लक्षण)"] --> B["ज्ञानोपयोग<br>(विशेष जानना)<br><br>(साकार)"] & C["दर्शनोपयोग<br>(सामान्य प्रतिमास)<br><br>(निराकार)"]
    B --> B1["5 सम्यग्ज्ञान"] & B2["3 मिथ्याज्ञान"]
    C --> C1["चक्षुदर्शन"] & C2["अचक्षुदर्शन"] & C3["अवधिदर्शन"] & C4["केवलदर्शन"]

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उपयोग (अध्यात्म भाषा से 3 प्रकार)
flowchart TB
    A["उपयोग<br>(अध्यात्म भाषा से 3 प्रकार)"] --> B["शुभोपयोग<br><br>(देव, शास्त्र, गुरु की भक्ति आदि)"] & C["अशुभोपयोग<br><br>(5 पाप, 4 कषाय व इन्द्रियों में प्रवृत्ति)"] & D["शुद्धोपयोग<br><br>(शुभ और अशुभ उपयोग से रहित<br>वीतराग भाव)"]

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    style C fill:#FFF9C4
    style D fill:#FFCDD2

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: ज्ञानोपयोग आठ प्रकार का है- (१) मति ज्ञानोपयोग (२) श्रुत ज्ञानोपयोग (३) अवधि ज्ञानोपयोग (४) मनःपर्यय ज्ञानोपयोग (५) केवल ज्ञानोपयोग (६) कुमति ज्ञानोपयोग (७) कुश्रुत ज्ञानोपयोग (८) विभंगज्ञानोपयोग।
अथवा- ज्ञानोपयोग दो प्रकार का है। (१) स्वभाव ज्ञानोपयोग (२) विभाग ज्ञानोपयोग।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: अन्तर्मुहूर्त काल तक मति, श्रुत, अवधि और मनःपर्यय ज्ञान अपने-अपने विषय को विशेष रूप से ग्रहण करता है, वह साकार उपयोग है। सकल पदार्थों के समुदाय से अलग होकर बुद्धि के विषय भाव को प्राप्त हुआ कर्म कारण आकार कहलाता है, उस आकार के साथ जो पाया जाता है वह साकार उपयोग कहलाता है। सामान्य को गौण करके विशेष को ग्रहण करने में कुशल जो उपयोग है वह साकारोपयोग है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 4 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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