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Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 7

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अनित्याशरणसंसारैकत्वान्यत्वाशुच्यास्रवसंवरनिर्जरालोकबोधिदुर्लभधर्म स्वाख्यातत्वानुचिन्तनमनुप्रेक्षाः ॥७॥सूत्रार्थ– अनित्य, अशरण, संसार, एकत्व, अन्यत्व, अशुचि, आस्रव, संवर, निर्जरा, लोक, बोधिदुर्लभ और धर्मस्वाख्यातत्व का बार-बार चिन्तन करना अनुप्रेक्षाएँ हैं॥७॥ भावार्थ…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 6

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – उत्तमक्षमामार्दवार्जवशौचसत्यसंयमतपस्त्यागाकिञ्चन्य-ब्रह्मचर्याणि धर्मः ॥६॥ सूत्रार्थ – उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य,…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 5

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – ईर्याभाषैषणादाननिक्षेपोत्सर्गाः समितयः ॥५॥सूत्रार्थ – ईर्या, भाषा, एषणा, आदाननिक्षेपण और उत्सर्ग- ये पाँच समितियाँ हैं ।।५।। भावार्थ अर्थ : ईर्या, भाषा, एषणा, आदान निक्षेपण…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 4

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सम्यग्योगनिग्रहो गुप्तिः ॥४॥सूत्रार्थ – योगों का सम्यक प्रकार से निग्रह करना गुप्ति है ।।४।। भावार्थ अर्थ : योग अर्थात् मन वचन और काय…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 3

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तपसा निर्जरा च ॥३॥सूत्रार्थ – तप से निर्जरा होती है और वह सर्व भी होता है ।।३।। भावार्थ अर्थ : तप से संवर…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 2

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – स गुप्तिसमितिधर्मानुप्रेक्षापरीषहजयचारित्रैः ॥२॥सूत्रार्थ– वह संवर गुप्ति, समिति, धर्म, अनुप्रेक्षा, परीषहजय और चारित्र से होता है ॥२॥ भावार्थ अर्थ : वह संवर गुप्ति, समिति,…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 1

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आस्रवनिरोधः संवरः ॥१॥सूत्रार्थ– आस्रव का निरोध संवर है ॥१॥ भावार्थ अर्थ : नए कर्मों के आने में जो कारण है उसे आस्रव कहते…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 26

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अतोऽन्यत्पापम् ॥२६॥सूत्रार्थ– इनके सिवा शेष सब प्रकृतियाँ पापरूप हैं ॥२६॥ भावार्थ अर्थ : इन पुण्य कर्म प्रकृतियों के सिवा शेष कर्म प्रकृतियाँ पाप…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 25

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सद्वेदयशुभायुर्नामगोत्राणि पुण्यम् ॥२५॥सूत्रार्थ– साता वेदनीय, शुभ आयु, शुभ नाम और शुभ गोत्र- ये प्रकृतियाँ पुण्यरूप हैं ॥२५॥ भावार्थ अर्थ : साता वेदनीय, तिर्यग्गायु,…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 24

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – नामप्रत्ययाः सर्वतो योगविशेषात्सूक्ष्मैकक्षेत्रावगाहस्थितः सर्वात्मप्रदेशेष्वनन्तानन्तप्रदेशाः ॥२४॥सूत्रार्थ– कर्म प्रकृतियों के कारणभूत प्रति समय योग विशेष के विशेष से सूक्ष्म, एकक्षेत्रावगाही और स्थित अनन्तानन्त पुद्गल परमाणु…