Tattvartha Sutra – Chapter 1-Sutra 25
Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – विशुद्धिक्षेत्रस्वामिविषयेभ्योऽवधिमनःपर्यययो:।।२५।।सूत्रार्थ – विशुद्धि, क्षेत्र, स्वामी और विषय की अपेक्षा अवधिज्ञान और मनःपर्ययज्ञान में भेद है।।२५।। भावार्थ अवधिज्ञान और मनःपर्यय ज्ञान में विशुद्धि, क्षेत्र…