Social Icons
Background image: DJainWiki Background image: DJainWiki

Press ESC to close

Tattvartha Sutra – Chapter 1- Sutra 15

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – अवग्रहेहावायधारणा:।।१५।।सूत्रार्थ – अवग्रह, ईहा, अवाय और धारणा – ये मतिज्ञान के चार भेद हैं।।१५।। भावार्थ अर्थ: अवग्रह, ईहा, आवाय और धारणा, ये चार…

Tattvartha Sutra – Chapter 1- Sutra 11

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – आद्ये परोक्षम्।।११।।सूत्रार्थ – प्रथम दो ज्ञान परोक्ष प्रमाण हैं।।११।। भावार्थ अर्थ: पाँच ज्ञानों में से आदि के दो मतिज्ञान और श्रुतज्ञान परोक्ष प्रमाण…

Tattvartha Sutra – Chapter 1- Sutra 10

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – तत्प्रमाणे।।१०।।सूत्रार्थ – वह पाँचों प्रकार का ज्ञान दो प्रमाण रूप हैं।।१०।। भावार्थ अर्थ: सूत्रकार का कहना है कि ज्ञान ही प्रमाण है, सन्नीकर्ष…

Tattvartha Sutra – Chatpter 1 – Mangalacharan

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – Mangalacharan/मंगलाचरण मोक्षमार्गस्य नेतारं भेत्तारं कर्मभूभृताम्।ज्ञातारं विश्वतत्त्वानां वन्दे तद्गुणलब्क्षये॥ भावार्थ – जो मोक्षमार्ग के नेता हैं, कर्मरुपी पर्वतों के भेदनेवाले हैं और विश्वतत्त्व के…

Tattvartha Sutra – Chapter 1- Sutra 33

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – नैगमसंग्रहव्यवहारर्जुसूत्रशब्दसमभिरूढैएवम्भूताः नयाः॥३३॥सूत्रार्थ – नैगम, संग्रह, व्यवहार, ऋजुसूत्र, शब्द, समभिरूढ और एवंभूत – ये सात नय हैं॥३३॥ भावार्थ नैगम, संग्रह, व्यवहार, ऋजुसूत्र, शब्द, समभिरूढ…

Tattvartha Sutra – Chapter 1-Sutra 32

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – सदसतोरविशेषाद्यदृच्छोपलब्धेरुन्मत्तवत्॥३२॥सूत्रार्थ – वास्तविक और अवास्तविक के अन्तर के बिना दृच्छोपलब्धि (जब जैसा जी में आया उस रूप ग्रहण होने) के कारण उन्मत्त की…

Tattvartha Sutra – Chapter 1-Sutra 31

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – मतिश्रुतावधयो विपर्ययश्च॥३१॥सूत्रार्थ – मति, श्रुत और अवधि – ये तीन विपर्यय भी हैं।॥३१॥ भावार्थ मति, श्रुत और अवधिज्ञान विपरीत भी होते हैं और…

Tattvartha Sutra – Chapter 1-Sutra 30

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – एकादीनि भाज्यानि युगपदेकस्मिन्नाचतुभर्यः॥३०॥सूत्रार्थ – एक आत्मा में एक साथ एक से लेकर चार ज्ञान तक भजना से होते हैं।॥३०॥ भावार्थ एक साथ एक…

Tattvartha Sutra – Chapter 1-Sutra 29

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – सर्वद्रव्यपर्यायेषु केवलस्य॥२९॥सूत्रार्थ – केवलज्ञान की प्रवृत्ति सब द्रव्य और उनकी सब पर्यायों में होती है॥२९॥ भावार्थ केवलज्ञान का विषय सर्व द्रव्यों की सर्व…

Tattvartha Sutra – Chapter 1-Sutra 26

Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – मतिश्रुतयोर्निबन्धो द्रव्येष्वसर्वपर्यायेषु॥२६॥ सूत्रार्थ – मतिज्ञान और श्रुतज्ञान की प्रवृत्ति कुछ पर्यायों से युक्त सब द्रव्यों में होती है।॥२६॥ भावार्थ मतिज्ञान और श्रुतज्ञान के विषय…