Social Icons
Background image: DJainWiki Background image: DJainWiki

Press ESC to close

Tattvartha Sutra – Chapter 10 – Sutra 8

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – धर्मास्तिकायाभावात् ॥८॥सूत्रार्थ– धर्मास्तिकाय का अभाव होने से मुक्त जीव लोकान्त से और ऊपर नहीं जाता ॥८॥ भावार्थ अर्थ: गतिरूप उपकार करने वाला धर्मास्तिकाय द्रव्य…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 30

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आर्तममनोज्ञस्य संप्रयोगे तद्विप्रयोगाय स्मृति समन्वाहारः ॥३०॥सूत्रार्थ– अमनोज्ञ पदार्थ के प्राप्त होने पर उसके वियोग के लिए चिन्तानताय (सतत चिन्ता) का होना प्रथम आर्तध्यान…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 29

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – परे मोक्षहेतू ॥२९॥सूत्रार्थ– उनमें से पर अर्थात् अन्त के दो ध्यान मोक्ष के हेतु हैं ।।२९।। भावार्थ अर्थ : अन्त के धर्म्य और…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 28

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आर्तरौद्रधर्म्यशुक्लानि ॥२८॥सूत्रार्थ– आर्त, रौद्र, धर्म्य और शुक्ल- ये ध्यान के चार भेद हैं।।२८।। भावार्थ अर्थ : ध्यान के चार भेद होते हैं। आर्त,…

Tattvartha Sutra – Chapter 10 – Sutra 7

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आविध्दकुलालचक्रवदव्यपगतलेपालाबुवदेरंडबीजवद्गनीशिखावच्च ॥७॥सूत्रार्थ– घुमाये हुए कुम्हार के चक्र के समान, लेप से मुक्त हुई तूमड़ी के समान, एरण्ड के बीज के समान और अग्नि…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 27

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – उत्तमसंहननस्यैकाग्रचिन्तानिरोधो ध्यानमान्तर्मुहूर्तात् ॥२७॥सूत्रार्थ– उत्तम संहननवाले का एक विषय में चिन्तावृत्ति का रोकना ध्यान है, जो अन्तर्मुहूर्त काल तक होता है ।।२७।। भावार्थ अर्थ…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 26

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – बाह्याभ्यन्तरोपध्यो ।।२६।।सूत्रार्थ– बाह्य और अभ्यन्तर उपधि का त्याग- यह दो प्रकार का व्युत्सर्ग है ।।२६।। भावार्थ अर्थ :  त्याग को व्युत्सर्ग कहते हैं।…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 25

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – वाचनापृच्छनानुप्रेक्षाऽम्नायधर्मोपदेशाः ॥२५॥ सूत्रार्थ – वाचना, पृच्छना, अनुप्रेक्षा, आम्नाय और धर्मोपदेश – यह पाँच प्रकार का स्वाध्याय है ।।२५।। भावार्थ अर्थ : वाचना, पृच्छना, अनुप्रेक्षा,…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 24

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आचार्योपाध्यायतपस्विशैक्षग्लानगणकुलसंघसाधुमनोज्ञानाम्॥२४॥सूत्रार्थ– आचार्य, उपाध्याय, तपस्वी, शैक्ष, ग्लान, गण, कुल, संघ, साधु और मनोज्ञ- इनकी वैयावृत्य के भेद से वैयावृत्य दस प्रकार का है ॥२४॥…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 23

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – ज्ञान-दर्शन- चरित्रोपचाराः ॥२३॥सूत्रार्थ– ज्ञानविनय, दर्शनविनय, चारित्रविनय और उपचारविनय- ये चार प्रकार की विनय हैं ।।२३।। भावार्थ अर्थ : ज्ञान विनय, दर्शन विनय, चारित्र…