Social Icons
Background image: DJainWiki Background image: DJainWiki

Press ESC to close

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 39

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – पृथक्त्वैकत्ववितर्कसूक्ष्मक्रियाप्रतिपातिव्युपरत- क्रियानिवर्तीनि ॥३९॥सूत्रार्थ– पृथक्त्ववितर्क, एकत्ववितर्क, सूक्ष्मक्रियाप्रतिपाति और व्युपरत-क्रियानिवृत्ति – ये चार शुक्लध्यान हैं ।।३९।। भावार्थ अर्थ : पृथक्त्ववितर्क, एकत्ववितर्क, सूक्ष्मक्रिया प्रतिपाति और व्युपरत…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 38

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – परे केवलिनः ॥३८॥सूत्रार्थ– शेष के दो शुक्लध्यान केवली के होते हैं ।।३८।। भावार्थ अर्थ : अन्त के दो शुक्ल ध्यान सयोग केवली और…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 37

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – शुक्ले चाद्ये पूर्वविदः ॥३७॥सूत्रार्थ– आदि के दो शुक्ल ध्यान पूर्वविद् के होते हैं ॥३७॥ भावार्थ अर्थ : आदि के दो शुक्ल ध्यान सकल…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 36

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आज्ञाऽपायविपाकसंस्थानविचयाय धर्म्यम् ॥३६॥ सूत्रार्थ– आज्ञा, अपाय, विपाक और संस्थान इनकी विचारणा (विचय) के लिये मन को एकाग्र करना सो धर्मध्यान है ॥३६॥ भावार्थ…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 35

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – हिंसाऽनृत-स्तेय-विषय संरक्षणेभ्यो रोद्रमविरत- देशविरतयोः ॥३५॥सूत्रार्थ– हिंसा, असत्य, चोरी और विषय संरक्षण के लिए सतत चिन्तन करना रौद्रध्यान है। वह अविरत और देशविरत के…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 34

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तदविरतदेशविरतप्रमत्तसंयतानाम् ॥३४॥सूत्रार्थ– यह आर्तध्यान अविरत, देशविरत और प्रमत्तसंयत जीवों के होता है ।।३४।। भावार्थ अर्थ : वह आर्तध्यान अविरत यानि पहले, दूसरे, तीसरे…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 33

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – निदानं च ॥३३॥सूत्रार्थ– निदान नाम का चौथा आर्तध्यान है।।३३।। भावार्थ अर्थ : भोगों की तृष्णा से पीड़ित होकर रात दिन आगामी भोगों को…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 32

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – वेदनायाश्च ॥३२॥शारीरिक वेदना होने पर उसकी निवृत्ति के लिए चिन्तन करना पीड़ा चिन्तन आर्त्तध्यान है॥३२॥ भावार्थ अर्थ : वात आदि के विकार से…

Tattvartha Sutra – Chapter 9 – Sutra 31

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – विपरीतं मनोज्ञस्य ॥३१॥सूत्रार्थ– मनोज्ञ वस्तु के वियोग होने पर उसकी प्राप्ति की सतत चिन्ता करना दूसरा आर्तध्यान है ॥३१॥ भावार्थ अर्थ : पुत्र,…

Tattvartha Sutra – Chapter 10 – Sutra 9

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – क्षेत्र-काल-गति-लिंग-तीर्थ-चारित्र-प्रत्येकबुद्ध-बोधित-ज्ञानावगाहनान्तर-संख्याल्पबहुत्वत: साध्याः ॥९॥सूत्रार्थ– क्षेत्र, काल, गति, लिंग, तीर्थ, चारित्र, प्रत्येकबुद्ध, बोधितबुद्ध, ज्ञान, अवगाहना, अन्तर, संख्या और अल्पबहुत्व- इन द्वारा सिद्ध जीव जाने जाते…