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Tattvartha Sutra – Chapter 4 – Sutra 12

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – ज्योतिष्का: सूर्याचन्द्रमसौग्रहनक्षत्रप्रकीर्णकतारकश्च ॥१२॥सूत्रार्थ- ज्योतिषी देव पाँच प्रकार के हैं – सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र और प्रकीर्णक तारे ॥१२॥ भावार्थ अर्थ: ज्योतिष्क देव पाँच…

Tattvartha Sutra – Chapter 5 – Sutra 22

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – वर्तनापरिणामक्रियाः परत्वापरत्वे च कालस्य ॥२२॥सूत्रार्थ – वर्तना, परिणाम, क्रिया, परत्व और अपरत्व – ये काल के उपकार हैं।।२२।। भावार्थ अर्थ : प्रति समय छहों…

Tattvartha Sutra – Chapter 4 – Sutra 11

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – व्यन्तरा: किन्नरकिम्पुरुषमहोरगगन्धर्वयक्षराक्षसभूतपिशाचा: ॥११॥सूत्रार्थ- व्यन्तर देव आठ प्रकार के हैं – किन्नर, किम्पुरुष, महोरग, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, भूत और पिशाच ॥११॥ भावार्थ अर्थ: अनेक…

Tattvartha Sutra – Chapter 5 – Sutra 21

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – परस्परोपग्रहो जीवानाम् ॥२१॥सूत्रार्थ – परस्पर निमित्त होना- यह जीवों का उपकार है ।।२१।। भावार्थ अर्थ : आपस में एक दूसरे की सहायता करना…

Tattvartha Sutra – Chapter 4 – Sutra 10

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – भवनवासिनोऽसुरनागविद्धुत्सुपर्णाग्निवातस्तनितोदधिद्वीपदिक्कुमाराः ॥१०॥सूत्रार्थ- भवनवासी देव दस प्रकार के हैं- असुरकुमार, नागकुमार, विद्युत्कुमार, सुपर्णकुमार, अग्निकुमार, वातकुमार, स्तनितकुमार, उदधिकुमार, द्वीपकुमार और दिक्कुमार ॥१०॥ भावार्थ अर्थ: जो…

Tattvartha Sutra – Chapter 5 – Sutra 20

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सुख- दुःख- जीवित- मरणोपग्रहाश्च ॥२०॥सूत्रार्थ – सुख, दुःख, जीवन और मरण – ये भी पुद्गलों के उपकार हैं ।।२०।। भावार्थ अर्थ : सुख-दुःख,…

Tattvartha Sutra – Chapter 5 – Sutra 19

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – शरीरवाङ्मन: प्राणापानाः पुद्गलानाम् ।।१९।।सूत्रार्थ – शरीर, वचन, मन और प्राणापान- यह पुद्गलों का उपकार है ।।१९।। भावार्थ अर्थ : शरीर, वचन, मन और…

Tattvartha Sutra – Chapter 5 – Sutra 18

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आकाशस्यावगाहः ॥१८॥सूत्रार्थ– अवकाश देना आकाश का उपकार है ॥१८॥ भावार्थ अर्थ : सब द्रव्यों को अवकाश देना आकाश द्रव्य का उपकार है।Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf…

Tattvartha Sutra – Chapter 5 – Sutra 17

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – गति- स्थित्युपग्रहौ धर्माधर्मयोरुपकारः ॥१७॥सूत्रार्थ – गति और स्थिति में निमित्त होना- यह क्रम से धर्म और अधर्म द्रव्य का उपकार है ।।१७।। भावार्थ…

Tattvartha Sutra – Chapter 5 – Sutra 16

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – प्रदेशसंहारविसर्पाभ्यांप्रदीपवत् ॥१६॥सूत्रार्थ – क्योंकि प्रदीप के समान जीव के प्रदेशों का संकोच और विस्तार होने के कारण लोकाकाश के असंख्येय भागाधिक में जीवों…