Tattvartha Sutra – Chapter 5 – Sutra 32
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अर्पितानर्पित-सिद्धेः ॥३२॥सूत्रार्थ – मुख्यता और गौणता की अपेक्षा एक वस्तु में विरोधी मालूम पड़ने वाले दो धर्मों की सिद्धि होती है ।।३२।। भावार्थ…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अर्पितानर्पित-सिद्धेः ॥३२॥सूत्रार्थ – मुख्यता और गौणता की अपेक्षा एक वस्तु में विरोधी मालूम पड़ने वाले दो धर्मों की सिद्धि होती है ।।३२।। भावार्थ…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तद्भावाव्ययं नित्यम् ॥३१॥सूत्रार्थ- उसके भाव से (अपनी जाति से) च्युत न होना नित्य है।।३१।। भावार्थ अर्थ : वस्तु के स्वभाव को तद्भाव कहते…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – उत्पादव्ययध्रौव्य-युक्तं सत् ॥३०॥सूत्रार्थ – जो उत्पाद, व्यय और ध्रौव्य- इन तीनों से युक्त अर्थात् इन तीनों रूप है, वह सत् है ।।३०।। भावार्थ…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सद् द्रव्य- लक्षणम् ॥२९॥सूत्रार्थ– द्रव्य का लक्षण सत् (अस्तित्व) है ॥२९॥ भावार्थ अर्थ : द्रव्य का लक्षण सत् है। अर्थात् जो सत् है वही…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – भेद- सङ्घाताभ्यां चाक्षुषः ॥२८॥सूत्रार्थ – भेद और संघात से चाक्षुष स्कन्ध बनता है ।।२८।। भावार्थ अर्थ : भेद और संघात दोनों से स्कन्ध…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – भेदादणुः ॥२७॥सूत्रार्थ – भेद से अणु उत्पन्न होता है ।।२७।। भावार्थ अर्थ : अणु की उत्पत्ति स्कन्धों के टूटने से होती है, संघात…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – भेद- संघातेभ्य उत्पद्यन्ते ॥२६॥सूत्रार्थ – भेद से, संघात से तथा भेद और संघात दोनों से स्कन्ध उत्पन्न होते हैं ।।२६।। भावार्थ अर्थ :…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अणवः स्कन्धाश्च ॥२५॥सूत्रार्थ – पुद्गल के दो भेद हैं- अणु और स्कन्ध ।।२५।। भावार्थ अर्थ : पुद्गल के दो भेद हैं – अणु…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – शब्दबन्धसौक्ष्म्यस्थौल्य संस्थानभेदतमश्छायातपोद्योतवन्तश्च ॥२४॥सूत्रार्थ- तथा वे शब्द, बन्ध, सौक्ष्म्य, स्थौल्य, संस्थान, भेद, अन्धकार, छाया, आतप और उद्योत वाले होते हैं ।।२४।। भावार्थ अर्थ :…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – स्पर्श-रस-गन्ध-वर्णवन्तः पुद्गलाः ॥२३॥सूत्रार्थ – स्पर्श, रस, गन्ध और वर्णवाले पुद्गल होते हैं ।।२३।। भावार्थ अर्थ : जिनमें स्पर्श, रस, गंध और वर्ण पाए…