Social Icons
Background image: DJainWiki Background image: DJainWiki

Press ESC to close

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 10

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तत्प्रदोषनिहनवमात्सर्यान्तरायासादनोपघाता ज्ञानदर्शनावरणयोः ॥१०॥ सुत्रार्थ- ज्ञान और दर्शन के विषय में प्रदोष, निवर्तन, मात्सर्य, अन्तराय, आसादन और उपघात– ये ज्ञानावरण और दर्शनावरण के आस्रव…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 9

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – निर्वर्तनानिक्षेपसंयोगनिसर्गा द्विचतुर्द्वित्रिभेदाः परम् ॥९॥ सुत्रार्थ- पर अर्थात् अजीवाधिकरण क्रम से दो, चार, दो और तीन भेद वाले निवर्तन, निक्षेप, संयोग और निर्यग् रूप…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 8

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आद्यं संरम्भ समारम्भारम्भ योग कृत कारितानुमत कषाय विशेषैस्त्रिस्त्रिश्चतुश्र्चैकशः ॥८॥ सुत्रार्थ- पहला जीवाधिकरण संरम्भ, समारम्भ और आरम्भ के भेद से तीन प्रकार का, योगों…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 7

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अधिकरणं जीवाजीवाः ॥७॥ सुत्रार्थ- अधिकरण जीव और अजीव रूप हैं ॥७॥ भावार्थ अर्थ: आस्रव के आधार जीव और अजीव हैं। यद्यपि जीव और…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 6

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तीव्रमन्दज्ञाताज्ञातभावाधिकरणवीर्यविशेषेभ्यस्तद्विशेषः ॥६॥ सुत्रार्थ– तीव्रभाव, मन्दभाव, ज्ञातभाव, अज्ञातभाव, अधिकरण और वीर्यविशेष के भेद से उसकी (आस्रव की) विशेषता होती है ॥६॥ भावार्थ अर्थ: तीव्र…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 5

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – इन्द्रिय-कषायाव्रतक्रिया: पञ्च-चतु: पञ्च-पञ्चविंशतिसंख्या: पूर्वस्य भेदा: ॥५॥ सुत्रार्थ- पूर्व के अर्थात् साम्परायिक कर्मास्रव के इन्द्रिय, कषाय, अव्रत और क्रिया रूप भेद हैं, जो क्रम…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 4

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सकषायकषाययो साम्परायिकेर्यापथयोः ।।४।। सुत्रार्थ- कषायसहित और कषायरहित आत्मा का योग क्रम से साम्परायिक और ईर्यापथ कर्म के आस्रव रूप है ।।४।। भावार्थ अर्थ:…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 3

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – शुभः पुण्यस्याशुभः पापस्य ।।३।। सुत्रार्थ- शुभयोग पुण्य का और अशुभयोग पाप का आस्रव है ।।३।। भावार्थ अर्थ: शुभ योग से पुण्य कर्म का…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 2

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – स आस्त्रवः ।।२।। सुत्रार्थ- वही आस्त्रव है ।।२।। भावार्थ अर्थ: यह योग ही आस्त्रव है। अर्थात् सरोवर में जिस द्वार से पानी आता…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 1

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – कायवाङ्मनः कर्मयोगः ।।१।। सुत्रार्थ- काय, वचन और मन की क्रिया योग है ।।१।। भावार्थ अर्थ: काय, वचन और मन की क्रिया को योग…