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Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 18

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – स्वभावमार्दवं च ॥१८॥ सुत्रार्थ- स्वभाव की मृदुता भी मनुष्यायु का आस्रव है ॥१८॥ भावार्थ अर्थ: स्वभाव से ही परिणामों का कोमल होना भी…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 17

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अल्पारम्भ-परिग्रहत्वं मानुषस्य ॥१७॥ सुत्रार्थ- अल्प आरम्भ और अल्प परिग्रहपने का भाव मनुष्यायु का आस्रव है ॥१७॥ भावार्थ अर्थ: थोड़ा आरम्भ और थोड़ा परिग्रह…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 16

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – मायातैर्यग्योनस्य ॥१६॥ सुत्रार्थ– माया तिर्यंचायु का आस्रव है ॥१६॥ भावार्थ अर्थ: मायाचार तिर्यंच आयु के आस्रव का कारण है ॥१६॥Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf English Meaning:…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 15

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – बह्वारम्भ परिग्रहत्वं नारकस्यायुषः ॥१५॥ सुत्रार्थ- बहुत आरम्भ और बहुत परिग्रहपने का भाव नरकायु का आस्रव है ॥१५॥ भावार्थ अर्थ: बहुत आरंभ और बहुत…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 2

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – देश- सर्वतोऽणु महती ॥२॥सूत्रार्थ – हिंसादिक से एकदेश निवृत्त होना अणुव्रत है और सब प्रकार से निवृत्त होना महाव्रत है ।।२।। भावार्थ अर्थ…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 1

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – हिंसाऽनृतस्तेयाब्रह्मपरिग्रहेभ्यो विरतिव्रतम् ॥१॥सूत्रार्थ – हिंसा, असत्य, चोरी, अब्रह्म और परिग्रह से विरत होना व्रत है ।।१।। भावार्थ अर्थ : हिंसा, अनृत, स्तेय, अब्रह्म…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 14

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – कषायोदयत्तीव्रपरिणामश्चारित्रमोहस्य ॥१४॥ सुत्रार्थ- कषाय के उदय से होने वाला तीव्र आत्मपरिणाम चारित्र मोहनीय का आस्रव है ॥१४॥ भावार्थ अर्थ: कषाय के उदय से…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 13

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – केवलिश्रुतसंघधर्मदेवावर्णवादो दर्शनमोहस्य ॥१३॥ सुत्रार्थ– केवली, श्रुत, संघ, धर्म और देव – इनका अवर्णवाद दर्शनमोहनीय कर्म का आस्रव है ॥१३॥ भावार्थ अर्थ: केवली, श्रुत,…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 12

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – भूतव्रत्यनुकम्पादानसरागसंयमादियोगः क्षान्तिः शौचमिति सद्वेद्यस्य ॥१२॥ सुत्रार्थ– भूत-अनुकम्पा, व्रती-अनुकम्पा, दान और सरागसंयम आदि का योग तथा क्षान्ति और शौच – ये सातावेदनीय कर्म के…

Tattvartha Sutra – Chapter 6 – Sutra 11

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – दुःखशोकतापाक्रन्दनवधपरिदेवनान्यात्मपरोभयस्थानान्य- सदवेदयस्य ॥११॥ सुत्रार्थ- अपने में, दूसरे में या दोनों में विद्यमान दुःख, शोक, ताप, आक्रन्दन, वध और परिदेवन – ये असाता वेदनीय…