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Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 28

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – परविवाहकरणेत्वरिकापरिगृहीतापरिगृहीता-गमनानङ्गक्रीड़ाकामतीव्राभिनिवेशाः ।।२८।।सूत्रार्थ – परविवाहकरण, इत्वरिकापरिगृहीतागमन, इत्वरिका- अपरिगृहीतागमन, अनंगक्रीड़ा और कामतीव्राभिनिवेश- ये स्वदारसंतोष अणुव्रत के पाँच अतिचार हैं।।२८।। भावार्थ अर्थ : पर विवाह करण,…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 5

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – पञ्चनवद्वयष्टाविंशतिश्चतुर्धीचत्वारिंशदद्विपञ्चभेदा यथाक्रमम् ॥५॥सूत्रार्थ– आठ मूल प्रकृतियों के अनुकूल में पाँच, नौ, दो, अट्ठाईस, चार, बयालीस, दो और पाँच भेद हैं ॥५॥ भावार्थ अर्थ…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 27

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere –  स्तेनप्रयोगतदाहृतादानविरुद्धराज्यातिक्रमहीनाधिक-हीनाधिकमानोन्मान-प्रतिरूपकव्यवहाराः ॥२७॥सूत्रार्थ- स्तेनप्रयोग, स्तेन आहृतादान, विरुद्धराज्यतिक्रम, हीनाधिक मानोन्मान और प्रतिरूपक व्यवहार- ये अचौर्य अणुव्रत के पाँच अतिचार हैं ।।२७।। भावार्थ अर्थ : स्तेन…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 26

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – मिथ्योपदेश-रहोभ्याख्यान-कूटलेखक्रिया-न्यासापहार-साकार-मंत्रभेदाः ॥२६॥सूत्रार्थ– मिथ्योपदेश, रहोभ्याख्यान, कूट लेख क्रिया, न्यासापहार और साकार मंत्र भेद, ये पाँच सत्याणुव्रत के अतिचार हैं ॥२६॥ भावार्थ अर्थ : मिथ्योपदेश,…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 25

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – बन्ध-वध-च्छेदातिभारारोपणान्नपाननिरोधः ॥ २५ ॥सूत्रार्थ – बन्ध, वध, छेद, अतिभार का आरोपण और अन्नपान का निरोध- ये अहिंसा अणुव्रत के पाँच अतिचार हैं ।।२५।।…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 24

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – व्रत-शीलेषु पंच पंच यथाक्रमम् ॥२४॥सूत्रार्थ – व्रतों और शीलों में पाँच-पाँच अतिचार हैं, जो क्रम से इस प्रकार हैं ।।२४।। भावार्थ अर्थ :…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 4

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आद्यौ ज्ञानदर्शनावरणवेदनीयमोहनीयायुर्नामगोत्रान्तरायाः ॥४॥सूत्रार्थ– पहला अर्थात् प्रकृतिबन्ध ज्ञानावरण, दर्शनावरण, वेदनीय, मोहनीय, आयु, नाम, गोत्र और अन्तराय रूप हैं ॥४॥ भावार्थ अर्थ : प्रकृति बंध…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 23

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – शंका- कांक्षा-विचिकित्साऽन्यदृष्टिप्रशंसा-संस्तवाः सम्यग्दृष्टेरतिचाराः ॥२३॥सूत्रार्थ – शंका, कांक्षा, विचिकित्सा, अन्यदृष्टिप्रशंसा और अन्यदृष्टिसंस्तव- ये सम्यग्दृष्टि के पाँच अतिचार हैं ।।२३।। भावार्थ अर्थ : शंका, कांक्षा,…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 3

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – प्रकृतिस्थित्यनुभवप्रदेशास्तद्विधयः ॥३॥सूत्रार्थ– उसके प्रकृति, स्थिति, अनुभव और प्रदेश– ये चार भेद हैं ॥३॥ भावार्थ अर्थ : प्रकृति बंध, स्थिति बंध, अनुभाग बंध और…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 2

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सकषायत्वाज्जीवः कर्मणो योग्यान्पुद्गलानादत्ते स बन्धः ॥२॥सूत्रार्थ– कषाय सहित होने से जीव कर्म के योग्य पुद्गलों को ग्रहण करता है, वह बन्ध है ॥२॥…