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Acharya Shri Umaswati
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ब्रह्मलोकालया लोकान्तिकाः ॥२४॥
सूत्रार्थ– लोकान्तिक देवों का ब्रह्मलोक निवासस्थान है ॥२४॥




भावार्थ

अर्थ: ब्रह्मलोक नाम के पाँचवें स्वर्ग में रहने वाले देव लोकान्तिक हैं। उनका लोकान्तिक नाम सार्थक है क्योंकि लोक यानी ब्रह्मलोक, उसके अन्त में जो रहते हैं वे लोकान्तिक हैं। अभिप्राय यह है कि जिन विमानों में लोकान्तिक रहते हैं वे विमान ब्रह्मलोक के अन्त में हैं अथवा लोक यानी संसार, उसका अन्त जिनका आ गया है, वे लोकान्तिक हैं; क्योंकि लोकान्तिक देव मरकर और एक जन्म लेकर मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं ॥२४॥
Reference: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

Brahmaloka is the abode of the ‘laukāntika’ deva.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान:नहीं, ब्रह्मलोक सामान्य पद होने पर भी पाँचवें स्वर्ग के निवासी सभी लोकान्तिक नहीं होते, क्योंकि ब्रह्मलोक का अन्त लोकान्त और उसमें रहने वाले लोकान्तिक होते हैं। इस लोकान्तिक का फलितार्थ ब्रह्मलोक के अन्त में रहने वाले लोकान्तिक हैं। अथवा जन्म-जरा-मरण से व्याप्त लोक है, उस लोक का अन्त करना जिनका प्रयोजन है वे लोकान्तिक हैं। वे लोकान्तिक निकट संसारी हैं। वहाँ से च्युत होकर गर्भवास प्राप्त कर नियम से मोक्ष चले जाते हैं।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 22 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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