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Acharya Shri Umaswati
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उपयोगो लक्षणम्॥८॥
सूत्रार्थ– उपयोग जीव का लक्षण है॥८॥

भावार्थ

अर्थ: जीव का लक्षण उपयोग है। चैतन्य के होने पर ही होने वाले परिणाम को उपयोग कहते हैं। यह उपयोग सब जीवों में पाया जाता है और जीव के सिवा अन्य द्रव्यों में नहीं पाया जाता॥८॥
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

English Meaning:

Cognition (upayoga) is the mark (laksana) – distinctive characteristic – of the soul (jīva).
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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लक्षणाभास
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    A["लक्षणाभास (सदोष लक्षण)"] --> B["अव्याप्ति<br>जैसे— जीव का लक्षण<br>केवलज्ञान"] & C["अतिव्याप्ति<br>जीव का लक्षण<br>स्मृति"] & D["असम्भव<br>जीव का लक्षण<br>स्पर्श, रस, गन्ध, वर्ण"]

    style A fill:#FF6D00
    style B fill:#FFE0B2
    style C fill:#FFE0B2
    style D fill:#FFE0B2

flowchart TB
    A["लक्षण<br>(बहुत से मिले पदार्थों में से<br>एक को जुदा करने वाला हेतु)"] --> B["आत्मभूत<br>(जैसे— उपयोग जीव का आत्मभूत लक्षण है)"] & C["अनात्मभूत"]

    style A fill:#FF6D00
    style B fill:#FFE0B2
    style C fill:#FFF9C4

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: जो वस्तु के स्वरूप से मिला हुआ हो उसे आत्मभूत लक्षण कहते हैं, जैसे अग्नि की उष्णता। यह उष्णता अग्नि का स्वरूप होती हुई अग्नि को जल आदि पदार्थों से जुदा करती है। इसलिए उष्णता अग्नि का आत्मभूत लक्षण है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: जो अंतरंग और बहिरंग दोनों प्रकार के निमित्तों से होता है और चेतन्य का अनुवर्ती है अर्थात् चेतन्य को छोड़कर अन्यत्र नहीं रहता वह परिणाम उपयोग कहलाता है। आत्मा के चेतनानुवर्ती परिणाम को उपयोग कहते हैं। चेतन्य ही आत्मा के अनुसार चलता है। तो उसके अनुवर्ती परिणाम को उपयोग कहते हैं। उपयोग जो पदार्थ ग्रहण के समय दृष्ट होता है, यह पर है। इस प्रकार अर्थ ग्रहण रूप से व्यापार करता है वह चेतन्य का अनुगामी है। जीव का जो भाव वस्तु को ग्रहण करने के लिए प्रस्तुत होता है उसको उपयोग कहते हैं। तात्त्विक भाव को प्राप्त उपयोग ही जीव का लक्षण है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 3 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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