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Acharya Shri Umaswami
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प्रमाणनयैरधिगमः।।६।।
सूत्रार्थ – प्रमाण और नयों से पदार्थों का ज्ञान होता है।।६।।

भावार्थ

तत्वों और रत्नत्रय  का (अधिगम:) ज्ञान (प्रमाणनयै) प्रमाणों और नयों से (भवती) होता है।
Ref: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष

English Meaning:

The knowledge (of the seven categories) is attained by means of pramāõa and naya.
Ref: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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संक्षिप्त रुचि शिष्यों के लिए –
पदार्थों को जानने के उपाय
प्रमाण
• सच्चा ज्ञान
• पदार्थों को सर्वदेश ग्रहण करता है।
नय
• श्रुत ज्ञान का अवयव (अंश)
• पदार्थों का एकदेश ग्रहण करता है।

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: जिस प्रकार मिथ्यात्व के उदय से ज्ञान, अज्ञान हो जाता है, अविरति भाव उदित होते हैं और सम्यक् रूप भाव ढक जाता है वैसे ही सुनय, दुर्नय और प्रमाण, दुःप्रमाण हो जाते हैं। मिथ्यादृष्टि के भेद या उपचार का ज्ञान नियम से मिथ्या होते हैं और सम्यकत्व हो जाने पर वही सम्यक् खा जाता है के नय और प्रमाण सम्यक् होते हैं। तहाँ उस मिथ्यारूप ज्ञान से बंध और सम्यक् रूप से मोक्ष होता है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर : प्रमाण के द्वारा सम्यक् प्रकार से ग्रहण की गई वस्तु के एक धर्म (अंश) को ग्रहण करने वाले ज्ञान को नय कहते हैं।



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 12-Dec-2025.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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