Table of Contents

Acharya Shri Umaswami
Read About Acharya Umaswami
here

नामस्थापनाद्रव्यभावतस्तन्न्यासः।।५।।
सूत्रार्थ– नाम, स्थापना, द्रव्य और भाव रूप से उनका अर्थात् सम्यग्दर्शन आदि और जीव आदि का न्यास अर्थात् निर्देश होता है।५।

भावार्थ

(नामस्थापनाद्रव्यभावतः:) नाम, स्थापना, द्रव्य और भाव से (तत्त्व) उन सातों तत्त्वों और रत्नत्रय  का (न्यास:) निक्षेप या लोकव्यवहार (भवति) होता है।
Ref: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष

English Meaning:

These are installed – nyāsa or niksepa – (in four ways) by name – nāma, representation – sthāpanā, substance and its potentiality – dravya, and actual state – bhāva.
Ref: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Graphical representation
नामस्थापनाद्रव्यभाव
स्वरूपजिस पदार्थ में जो गुण नहीं, उसको उस नाम से कहना“वह यह है” इस प्रकार बुद्धि से अधिष्ठित करनाजो गुणों को प्राप्त हुआ था अथवा “गुणों” को प्राप्त करनावर्तमान पर्याय संयुक्त वस्तु
उदाहरणवीरता न होने पर भी महावीर नाम रखनामहावीर की प्रतिमा को महावीर कहनाराजकमल की वर्तमान पर्याय को “महावीर भगवान” कहनाअन्य चरित्रयुक्त को “भगवान महावीर” कहना

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान : जो नय और प्रमाण तथा निक्षेप के अर्थ का निरीक्षण नहीं करता है, उसको अयुक्त पदार्थ युक्त और युक्त पदार्थ अयुक्त ही प्रतीत होता है। निक्षेपों को छोड़कर वर्णन किया गया सिद्धान्त संभव है कि वक्ता और श्रोता दोनों को कुमार्ग में ले जावे, इसलिए भी निक्षेपों का कथन करना चाहिए। द्रव्य विविध स्वभाव वाला है। उनमें से जिस-जिस स्वभाव रूप से वह ध्येय होता है, उस-उसके निमित्त ही एक द्रव्य को नामादि चार भेद रूप कर दिया जाता है जो निक्षेप, नय और प्रमाण को जानकर तत्व को भाते है वे तथ्य-तत्वमार्ग में संलग्न होकार तथ्य तत्व को प्राप्त करते है। जो व्यक्ति गुण व पर्यायों के लक्षण, उनके स्वभाव, निक्षेप, नय व प्रमाण को जानता है, वही सर्व विशेषों से युक्त द्रव्य-स्वभाव को जानते है।

उत्तर : निश्चय सामान्य से चार प्रकार के होते हैं— नाम निक्षेप, स्थापना निक्षेप, द्रव्य निक्षेप और भाव निक्षेप। अनन्त पदार्थों के अनन्त निक्षेप विस्तार से होते हैं, परन्तु उन सब का संक्षेप में अन्तर्भाव होता है, अर्थात संक्षेप में निक्षेप चार होते हैं और विस्तार में अनन्त निक्षेप होते हैं।



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 12-Dec-2025.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



All Sutras Chapter2

    All Chapters