Table of Contents

Acharya Shri Umaswati
Read About Acharya Umaswami
here


Sutra
असंख्येयाः प्रदेशा धर्माधर्मैकजीवानाम् ॥८॥
Meaning
धर्म द्रव्य, अधर्म द्रव्य और एक जीव द्रव्य, इनमें से प्रत्येक के असंख्यात, असंख्यात प्रदेश होते हैं॥८॥

भावार्थ

 जितने आकाश को पुद्गल का एक परमाणु रोकता है उतने क्षेत्र को प्रदेश कहते हैं। धर्म द्रव्य और अधर्म द्रव्य तो निष्क्रिय हैं और समस्त लोकाकाश में व्याप्त हैं। अतः लोकाकाश के असंख्यात प्रदेशों में व्याप्त होने से वे दोनों असंख्यात, असंख्यात प्रदेशी हैं। जीव भी उतने ही प्रदेशी हैं किंतु उसका स्वभाव सकुचने और फैलने का है। अतः नाम कर्म के द्वारा उसे जैसा छोटा या बड़ा शरीर मिलता है उतने में ही फैलकर रह जाता है। किंतु जब केवलज्ञानी होकर वह लोक पूरण समुद्घात करता है तब वह भी धर्म-अधर्म द्रव्य की तरह समस्त लोकाकाश में व्याप्त हो जाता है। अतः वह भी असंख्यात प्रदेशी ही है ॥८॥ Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

There are innumerable (asamkhyāta ) space-points (pradeśa) in the medium of motion (dharma), the medium of rest (adharma) and in each individual soul (jīva). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain



Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer  ‘अजीवकाया…’ इस सूत्र में काय शब्द के ग्रहण करने पर प्रदेशों के अस्तित्व मात्र का ज्ञान होता है, प्रदेशों की इयत्ता (परिमाण) की अवधारणा नहीं होती इसलिए उनकी संख्या का निर्धारण करने के लिए यह सूत्र कहा गया है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer संख्या विशेष से अतीतत्व होने से वे असंख्येय हैं । संख्यान, संख्या और गणना ये एकार्थवाची हैं। स्वलक्षण से परस्पर विशेष्य- विशेष हैं, संख्या का विशेष संख्या विशेष है और संख्या को अतिक्रान्त असंख्येय है, जो गिनती की सीमा को पार कर गये हैं, जो किसी के द्वारा गिने नहीं जा सकते हैं, उनको असंख्येय कहते हैं ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 11-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



All Sutras Chapter2


    All Chapters