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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
निष्क्रियाणि च ॥ ७ ॥
Meaning
ये द्रव्य निष्क्रिय हैं॥ ७ ॥

भावार्थ

धर्म, अधर्म और आकाश ये तीनों द्रव्य क्रियारहित हैं। क्रिया – एक स्थान से दूसरे स्थान में प्राप्त होने को क्रिया कहते हैं। नोट- धर्म और अधर्म द्रव्य समस्त लोकाकाश में व्याप्त हैं तथा आकाशद्रव्य लोक और अलोक दोनों जगह व्याप्त है। इसलिये अन्य क्षेत्र का अभाव होने से इनमें हलन चलन रूप क्रिया नहीं होती ।Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

English Meaning:

These three [the medium of motion (dharma), themedium of rest (adharma) and the space (ākāśa ) ] are also without-movement ( niskriya). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


6 द्रव्य
नामजीवपुद्गलधर्मअधर्मआकाशकाल
स्वरूपउपयोगजिसमें स्पर्श, रस, गंध, वर्ण पाए जाएँजीवन व पुद्गलों को गमन में सहकारीजीवन व पुद्गलों को ठहरने में सहकारीसभी को अवकाश देने में सहकारीसभी के परिवर्तन में सहकारी
द्रव्य अंश (गुणों का समूह)
अजीव द्रव्य (जिसमें चेतना नहीं)
कार्य (बहुद्रव्यी)
अजीव द्रव्य (दोनों)
नित्य (कभी नष्ट नहीं)
अव्यवस्थित (संख्या क्रम स्थिर नहीं)
अस्पर्शी (वर्णादि रहित)
स्पर्शी (वर्णादि सहित)
निष्क्रिय (क्षेत्रान्तर व परिवर्तन क्रिया रहित)
द्रव्यों की संख्याअनंतअनंतएकएकएकअसंख्यात
एक संख्या
अनंत संख्या
असंख्यात संख्या

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer यह आपत्ति उचित नहीं है। जैसे चक्षु रूप के देखने में सहायक है किंतु यदि मनुष्य का मन दूसरी ओर लगा हो तो चक्षु रूप को देखने का आग्रह नहीं करती। इसी तरह धर्मादि द्रव्य भी चलने में उदासीन निमित्त हैं, प्रेरक नहीं हैं ॥ ७ ॥
Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

Answer अभ्यन्तर कारण – क्रिया परिणाम शक्ति युक्त द्रव्य अभ्यन्तर ( उपादान) कहलाता है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 11-feb-2026

Courtesy:
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