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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
आ आकाशादेकद्रव्याणि ॥ ६ ॥
Meaning
आकाशपर्यन्त द्रव्य एक-एक हैं॥ ६ ॥

भावार्थ

अधर्मद्रव्य और आकाशद्रव्य एक-एक हैं। जीवद्रव्य अनन्त हैं । पुद्गलद्रव्य अनन्तानन्त हैं। कालद्रव्य असंख्यात (अणुरूप) हैं। Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूषLink to book

English Meaning:

Up to the space (ākāśa), each substance (dravya) is an indivisible whole (i.e., single continuum). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain



Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer सूत्र में ‘द्रव्याणि’ पद निरर्थक नहीं है क्योंकि द्रव्य की अपेक्षा एकत्व का ख्यापन करने के लिए द्रव्य पद दिया गया है। केवल ‘एकैकं’ कहने से यह पता नहीं चलता कि ये किस अपेक्षा से एक कहे जा रहे हैं, द्रव्य की अपेक्षा या क्षेत्र, काल, भाव की अपेक्षा अतः असंदिग्ध रूप से द्रव्य की अपेक्षा का सूचन करने के लिए ‘द्रव्य’ पद देना सार्थक ही है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer सूत्र में ‘आङ्’ पद का अर्थ अभिविधि है। अभिविधि का अर्थ है अभिव्याप्ति, अभिव्याप्ति के अर्थ में यहाँ ‘आङ्’ का प्रयोग किया गया है। इससे आकाश के भी एक द्रव्यत्व का कथन हो जाता है। ‘अजीवकाया:’ इस सूत्र की आनुपूर्वी का आश्रय लेकर यह सूत्र कहा गया है इसलिये इससे धर्म, अधर्म और आकाश को ग्रहण करना चाहिए।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 11-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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