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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
सुख – दुःख – जीवित – मरणोपग्रहाश्च ॥२०॥
Meaning
इन्द्रियजन्य सुख, दुःख, जीवन और मरण ये भी पुद्गल द्रव्य के उपकार॥२०॥

भावार्थ

इस सूत्र में जो उपग्रह शब्द का ग्रहण किया है उससे सूचित होता है कि पुद्गल परस्पर में एक दूसरे का भी उपकार करते हैं। जैसे- राख कांसे का और साबुन कपड़े का इत्यादि । यहाँ उपकार शब्द का अर्थ निमित्तमात्र ही समझना चाहिये । अन्यथा दुःख, मरण आदि उपकार नहीं कहलावेंगे।Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

English Meaning:

The function of the matter (pudgala) is also to contribute to pleasure (sukha), suffering (duhkha), living (jīvita), and death (marana) of living beings (jīva). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


पुद्गल का उपकार

flowchart TB

A["पुद्गल का उपकार"]

A --> B["सुख"]
A --> C["दुःख"]
A --> D["जीवन"]
A --> E["मरण"]

B --> B1["साता वेदनीय का उदय होने पर जीव को प्रसन्नता"]

C --> C1["असाता वेदनीय का उदय होने पर जीव को अप्रसन्नता"]

D --> D1["आयु कर्म का बने रहना"]

E --> E1["आयु कर्म का उच्छेद - समाप्त होना"]


उपर्युक्त सभी पुद्गल और अन्य जीव का जीव पर निमित्त रूप उपकार है

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer साता वेदनीय के उदय रूप अन्तरंग हेतु के रहते हुए बाह्य द्रव्यादि के परिपाक के निमित्त से जो प्रीति रूप परिणाम उत्पन्न होते हैं वह सुख है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer परिणाम विशेष से गृहीत पुद्गल जैसे- शरीर, वचन, मन और श्वासोच्छ्वास चतुष्टय, गमन, व्यवहरण, चिन्तन और श्वासोच्छ्वास रूप से जीव का उपकार करते हैं वैसे सुख आदि भी पुद्गल कृत उपकार हैं, उसको बताने के लिए यह सूत्र कहा है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 12-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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