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Acharya Shri Umaswati
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परतः परतः पूर्वपूर्वाऽनन्तरा ।।३४।।
सूत्रार्थ– आगे-आगे पूर्व-पूर्व की उत्कृष्ट स्थिति अन्तर-अन्तर की जघन्य स्थिति है ।।३४।।




भावार्थ

अर्थ: नीचे-नीचे के स्वर्गों में जो उत्कृष्ट आयु है वही उसके ऊपर के स्वर्गों में जघन्य आयु है। अर्थात् सौधर्म–ऐशान में जो दो सागर से अधिक आयु है वह सानत्कुमार और माहेन्द्र स्वर्ग में जघन्य आयु है। सानत्कुमार–माहेन्द्र में जो सात सागर से अधिक उत्कृष्ट आयु है वही ब्रह्म–ब्रह्मोत्तर में जघन्य है। इसी तरह ऊपर के समस्त कल्पों में और कल्पातीतों में जानना चाहिए ।।३४।।
Reference: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

The maximum lifetime in the immediately preceding kalpa is the minimum lifetime in the next kalpa.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: जो पर अर्थात् अगले देश में है उसका नाम परतः है। ‘परतः परतः’ यह वीप्सा में द्वित्व है। पूर्व शब्द के भी वीप्सा में द्वित्व जानना चाहिए। इसका तात्पर्य यह है कि पूर्व-पूर्व के देवों की जो उत्कृष्ट स्थिति है, वह उपरि देवों की जघन्य स्थिति है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: यह अधिकार विजयादिक तक है। अर्थात् पूर्व-पूर्व की उत्कृष्ट स्थिति आगे-आगे की जघन्य स्थिति है, यह अधिकार विजयादि अनुत्तरों तक समझना चाहिए। सर्वार्थसिद्धि का पृथक ग्रहण करने से यही सूचित होता है कि यह जघन्य स्थिति का क्रम विजयादिक तक ही चलता है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 23 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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