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Acharya Shri Umaswati
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पीतपद्मशुक्ललेश्या द्वित्रिशेषेषु ॥२२॥
सूत्रार्थ– दो, तीन, कल्प युगलों में और शेष में क्रम से पीत, पद्म और शुक्ल लेश्यावाले देव हैं ॥२२॥




भावार्थ

अर्थ: सौधर्म और ईशान स्वर्ग के देवों में पीत लेश्या है। सानत्कुमार और माहेन्द्र स्वर्ग के देवों में पीत और पद्म लेश्या है। ब्रह्म, ब्रह्मोत्तर, लान्तव और कापिष्ठ स्वर्ग में पद्म लेश्या है। शुक्र, महाशुक्र, शतार और सहस्रार में पद्म और शुक्ल लेश्या है। शेष आनत आदि कल्पों में शुक्ल लेश्या है। उनमें भी अनुदिश और अनुत्तरों में पद्म शुक्ल लेश्या है ॥२२॥
Reference: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

In two, three and the rest (pairs of) kalpa the celestial beings are of yellow (pīta), pink (padma) and white (śukla) thought-colouration (leśyā), in succession.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: जिस कारण से सम्पूर्ण कर्मों का विसर्जोपचय शुक्ल ही होता है, इसलिए विग्रहगति में विद्यमान जीवों के शुक्ल लेश्या होती है। तत्पश्चात् शरीर को ग्रहण करके जब तक पर्याप्तियों को पूर्ण करता है तब तक छह वर्ण वाले परमाणुओं के पुंज से शरीर की उत्पत्ति होती है इसलिए उस शरीर की कापोत लेश्या कही जाती है। इस प्रकार अपर्याप्त अवस्था में शरीर सम्बन्धी ही दो लेश्याएँ होती हैं।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: पूर्व में (सूत्र २ में) भवनत्रिक में लेश्या को कह दिया अतः वैमानिक देवों की लेश्या बताने के लिए यह सूत्र कहा गया है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 22 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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