Acharya Shri Umaswami
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswami – आचार्य श्री १०८ उमास्वामीजी महाराज, जीवन परिचय आचार्य श्री उमास्वामी, जिन्हें उमास्वाति, उमास्वामिन्, वाचक उमास्वाति, नागरवाचक तथा गृद्धपिच्छाचार्य के नाम से भी जाना…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswami – आचार्य श्री १०८ उमास्वामीजी महाराज, जीवन परिचय आचार्य श्री उमास्वामी, जिन्हें उमास्वाति, उमास्वामिन्, वाचक उमास्वाति, नागरवाचक तथा गृद्धपिच्छाचार्य के नाम से भी जाना…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सामायिकच्छेदोपस्थापना– परिहारविशुद्धि-सूक्ष्मसाम्पराय- यथाख्यातमिति चारित्रम् ॥१८॥सूत्रार्थ– सामायिक, छेदोपस्थापना, परिहारविशुद्धि, सूक्ष्मसाम्पराय और यथाख्यात – यह पाँच प्रकार का चारित्र है ।।१८।। भावार्थ अर्थ : सामायिक…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – संयमश्रुतप्रतिसेवनातीर्थलिंगलेश्योपपादस्थानविकल्पतःसाध्याः ॥४७॥सूत्रार्थ– संयम, श्रुत, प्रतिसेना, तीर्थ, लिंग, लेश्या, उपपाद और स्थान के भेद से इन निर्ग्रन्थों का व्याख्यान करना चाहिए ।।४७।। भावार्थ अर्थ…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – पुलाकबकुशकुशीलनिर्ग्रन्थस्नातका निर्ग्रन्थाः ॥४६॥ सूत्रार्थ– पुलाक, बकुश, कुशील, निर्ग्रन्थ और स्नातक ये पाँच निर्ग्रन्थ हैं ।।४६।। भावार्थ अर्थ : पुलाक, वशुक, कुशील, निर्ग्रन्थ और स्नातक…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सम्यग्दृष्टिश्रावकविरतानन्तवियोजक – दर्शन-मोहक्षपकोपशमकोपशान्त- मोहक्षपक-क्षीणमोहजिना : क्रमशोऽसंख्येयगुणनिर्जराः ॥४५॥ सूत्रार्थ– सम्यग्दृष्टि, श्रावक, विरत, अनन्तानुबन्धिवियोगज, दर्शनमोह क्षपक, उपशमक, उपशान्तमोह, क्षपक, क्षीणमोह और जिन – ये क्रम…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – वीचारोऽर्थव्यञ्जनयोगसंक्रान्तिः ॥४४॥सूत्रार्थ– अर्थ, व्यंजन और योग की संक्रान्ति विचार है।।४४।।) सो वीचार है ॥४४॥ भावार्थ अर्थ : अर्थ से मतलब उस द्रव्य या…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – वितर्कः श्रुतम् ॥४३॥सूत्रार्थ– वितर्क का अर्थ श्रुत है।।४३।। भावार्थ अर्थ : विशेष रूप से तर्क अर्थात विचार करने को वितर्क कहते हैं। वितर्क…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अवीचारं द्वितीयम् ।।४२।। सूत्रार्थ– दूसरा ध्यान अविचार है ।।४२।। भावार्थ अर्थ : किन्तु दूसरा शुक्ल ध्यान वीचार रहित है। अर्थात् पहला शुक्ल ध्यान तो…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – एकाश्रये सवितर्कवीचा पूर्वे ॥४१॥सूत्रार्थ– पहले के दो ध्यान एक आश्रय वाले, सवितर्क और सविचार होते हैं ।।४१।। भावार्थ अर्थ : आदि के दोनों…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – त्र्येक-योग- काय – योगायोगानाम् ॥४०॥सूत्रार्थ– ये चार ध्यान क्रम से तीन योग वाले, एक योग वाले, काय योग वाले और अयोगी के होते…