Tattvartha Sutra – Chapter 1-Sutra 3
Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – तन्निसर्गादधिगमाव्दा।।३।।सूत्रार्थ – वह (सम्यदर्शन) निरसर्ग से और अधिगम से उत्पन्न होता है।।३।। भावार्थ सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति की अपेक्षा दो भेद होते हैं –…
Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – तन्निसर्गादधिगमाव्दा।।३।।सूत्रार्थ – वह (सम्यदर्शन) निरसर्ग से और अधिगम से उत्पन्न होता है।।३।। भावार्थ सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति की अपेक्षा दो भेद होते हैं –…
Acharya Shri UmaswamiRead About Acharya Umaswamihere – तत्त्वार्थश्रद्धानं सम्यदर्शनम्॥२॥सूत्रार्थ – अपने-अपने स्वरूप के अनुसार पदार्थों का जो श्रद्धान होता है,वह सम्यदर्शन है॥२॥ भावार्थ अर्थ : जीव आदि तत्त्वों के स्वरूप…