Tattvartha Sutra – Chapter 2- Sutra 3
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सम्यक्त्वचारित्रे ॥३॥सूत्रार्थ: औपशमिक भाव के दो भेद हैं – औपशमिक सम्यक्त्व और औपशमिक चारित्र ॥३॥ भावार्थ अर्थ: औपशमिक सम्यक्त्व और औपशमिक चारित्र ये…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सम्यक्त्वचारित्रे ॥३॥सूत्रार्थ: औपशमिक भाव के दो भेद हैं – औपशमिक सम्यक्त्व और औपशमिक चारित्र ॥३॥ भावार्थ अर्थ: औपशमिक सम्यक्त्व और औपशमिक चारित्र ये…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – औपशमिक-क्षायिकौ भावौ मिश्रश्च जीवस्यस्वतत्त्वमौदयिकपारिणामिकौ च ॥१॥सूत्रार्थ – औपशमिक, क्षायिक, मिश्र, औदायिक और पारिणामिक – ये जीव के स्वतत्त्व हैं॥१॥ भावार्थ अर्थ: औपशमिक, क्षायिक,…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – परस्परोदीरित- दुःखाः ॥४॥सूत्रार्थ– नारकी जीव (परस्परोदीरितः दुःखाः) आपस में एक दूसरे को दुःख देते हैं और वे कुत्तों की तरह परस्पर में एक…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – नारका नित्याशुभतर लेश्या- परिणाम देह-वेदना- विक्रियाः ॥३॥सूत्रार्थ– नारकी जीवों के सदा अशुभतर लेश्या, अशुभतर परिणाम, अशुभतर देह,अशुभतर वेदना और अशुभतर विक्रिया होती है।–…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तासु त्रिंशत्पंचविंशतिपंचदशदशत्रिपंचोनैक-नरक- शतसहस्राणि पञ्च चैव यथाक्रमम् ॥२॥सूत्रार्थ– (तास) उन पृथिवियों में (यथाक्रमम्) क्रम से (त्रिंशत् शतसहस्राणि) तीस लाख, (पञ्चविंशति) पच्चीस लाख (पञ्चदश) पन्द्रह…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – रत्न- शर्करा बालुका-पङ्गधूम तमो महातमः प्रभाभूमथो घनाम्बु- वाताकाश-प्रतिष्ठाः सप्ताऽधोऽधः ॥ १॥ सूत्रार्थ– (रत्नप्रभा) रत्नप्रभा (शर्कराप्रभा) शर्कराप्रभा, (बालुकाप्रभा) बालुकाप्रभा, (पङ्कप्रभा ) पङ्कप्रभा, (धूमप्रभा) धूमप्रभा…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – व्दिनवाष्टादशैकविंशतित्रिभेदा यथाक्र मम् ॥२॥सूत्रार्थ: उक्त पाँच भावों के क्रम से दो, नौ, अठारह. इक्कीस और तीन भेद हैं ॥२॥ भावार्थ अर्थ: औपशमिक भाव…
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