Tattvartha Sutra – Chapter 4 – Sutra 4
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – इन्द्रसामानिकत्रायस्त्रिंशपारिषदात्मरक्षलोकपालानिकप्रकीर्णकाभियोग्य किल्ल्विषिकाश्चैकशः ॥४॥सूत्रार्थ- उक्त दस आदि भेदों में– से प्रत्येक इन्द्र, सामानिक, त्रायस्त्रिंश, पारिषद्, आत्मरक्ष, लोकपाल, अनीक, प्रकीर्णक, आभीयोग्य और किल्ल्विषिक रूप हैं…